दाढ़ी और शरीर के बाल मूंडने के बारे में क्या हुक्म है?

दाढ़ी और शरीर के बाल मूंडने के बारे में क्या हुक्म है?

सवाल :
चेहरे के बाल और शरीर पर जो बाल होते हैं उनके शेविंग मशीन या दूसरी किसी मशीन से काटने के बारे में क्या हुक्म है?

जवाब :
सिर्फ़ चेहरे के बाल(दाढ़ी)(1) को मूंडना या काटना शेविंग मशीन से, इस तरह कि लोग कहें दाढ़ी नहीं बची, एहतियात ए वाजिब की बिना पर हराम है। (2) यहां तक कि दाढ़ी का एक हिस्सा भी उसे पूरा मूंडने के हुक्म के अन्दर माना जाएगा। (3) इसलिए, गालों या गर्दन पर जो बाल होते हैं और जो गर्दन के पीछे वाले बाल दो दाढ़ी के हिस्से में नहीं आते और बग़ल के अन्दर के बाल भी वगैरह इन को मूंडने की इजाज़त है।
ग़ौरतलब कि इस्लाम ने सफ़ाई पर ख़ास तवज्जो दी है और ज़ोर दिया है कि शरीर के ज़्यादा बालों को दूर करें।

यहां, हम कुछ इस्लामिक मशविरे लिख रहे हैं जो कि सेहत की हिफ़ाज़त के बारे में हैं :

1- सर के बालों का काटना और उनका ख़याल रखना साथ में उन्हें धोना और कंघी करना मुस्तहब है। (4)
2- मूछों (5), नाक(6), और बग़ल के बाल(7) काटना मुस्तहब है।
3- मुसतहब है कि नाफ़ के नीचे के बाल कांटे जाएं और कहा गया है कि यह ख़ुदा और क़यामत पर इमान होने की एक निशानी है और ऐसा रसूल अकरम (सअ) से रिवायत में भी आया है। (8)
4- शरीर के और हिस्सों के बाल कांटना हाईजीनिक(हिफ़ज़ाने सेहत) का सबब है और इसके अलग अलग पाॅज़िटिव जिस्मानी और दिमाग़ी असर होते हैं, और इनको रखना ख़ास तरह के जिस्मानी व दिमाग़ी नुक़सान की वजह होता है। (9)
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[1] चेहरे के बाल के बढ़ने का मामला पहली बार तब सामने आया जब हज़रत आदम ने यह दुआ की : “ऐ अल्लाह! मेरे हुस्न में इज़ाफ़ा फ़रमा!” अल्लाह ने जवाब दिया, मैंने दाढ़ी को तुम्हे और तुम्हारी औलादों के लिए क़यामत के दिन तक ज़ीनत बनाया है।” रसूल ए इस्लाम की एक हदीस मे है कि उन्होंने कहा कि दाढ़ी इतनी ही है तक लम्बी रखो कि यहूदियों और ज़ोरोराशटरियन के जैसे ना दिखो।
देखें : हिलयतुल मुत्तक़ीन, पांचवी किताब, चौथा और पांचवा पाठ

[2] इमाम ख़ुमैनी के इसतिफ़तात, जिल्द 2 (मकासिब मुहर्रमा), पेज 30, 31, 32

[3] क्या गोटी नुमा दाढ़ी रखने की इजाज़त है? सारे मराजे किराम (सिवाए आयतुल्लाह मकारिम और तबरेज़ी) : नहीं, यह काफ़ी नहीं है और ऐसा करना पूरी दाढ़ी मूंडने जैसा है।
इमाम ख़ुमैनी, इस्तिफ़तात, जिल्द 2, मकासिब मुहर्रमा / आयतुल्लाह वाहिद ख़ुरासानी, अजविबा अल इस्तिफ़तात / आयतुल्लाह सीसतानी, http://www.sistani.org, beard shaving, सवाल 1 और 3 / आयतुल्लाह सफ़ी गुलपायगानी, जामि अल अहकाम, जिल्द 2 / आयतुल्लाह बहजत, तौज़िहुल मसाएल, विविध, सवाल नम्बर 4 / आयतुल्लाह नूरी, इस्तिफ़तात, जिल्द 1 / आयतुल्लाह फ़ाज़िल लंकरानी, जामि अल मसाएल, जिल्द 1 //

[4] हिलयतुल मुत्तक़ीन, पांचवीं किताब, तीसरा पाठ

[5] हदीस में है : मूंछों का कांटना रसूले इस्लाम (सअ) के तरीकों में से है ; लम्बी मूंछे शैतान की जगह हैं। दाढ़ी काटने से रिज़्क़ में इज़ाफ़ा होता है, दुख और वसवसे से दूर होता है और कोढ़ से बचा रहता है, और जो अपनी मूंछें नही काटता वह हम में से नही है। हिलयतुल मुत्तक़ीन, पांचवी किताब, चौथा पाठ
(यहां दाढ़ी काटने का मतलब यह है कि उसे हद से ज़्यादा ना लम्बा होने दिया जाए कि जिससे सफ़ाई में परेशानी हो)

[6] नाक के बाल हटाने से चेहरे की ख़ूबसूरती में इज़ाफ़ा करता है। हिलयतुल मुत्तक़ीन, पांचवीं किताब, सांतवा पाठ।

[7] बग़ल के बाल शैतान की जगह समझे जाते हैं। वास्तव में! इन बालों को कैसे दूर किया जाए इस बारे में कहा गया है। बाल सफ़ा बेहतर है काटने से और काटना बेहतर है तोड़ने से यानी खींच कर निकालना। (बाल सफा ऐसी चीज़ होती है जिस से लगाने से बाल उतर जाते हैं।)
हिलयतुल मुत्तक़ीन, सांतवा पाठ।

[8] रसूल अकरम (सअ) की रिवायत में है कि बाल कांटना इमान की निशानी है। सांतवा पाठ

[9] शरीर के बाल कांटने से शरीर की ऊर्जा, सेहत में इज़ाफ़ा होता है और सुस्ती व तकलीफ़ मिटती है, और सफ़ाई बढ़ती है और हमारे रसूल (सअ) की सीरत का भी हिस्सा है।
हिलयतुल मुत्तक़ीन, नौवां पाठ ।

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आदिल अब्बास

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